क्या जानूँ साजन होती है क्या ग़म की शामजल उठे सौ दिये जब लिया तेरा नामक्या जानूं साजन काँटों में मैं खड़ीनैनों के द्वार पेनिस दिन बहार के देखूँ सपने
काँटों में मैं खड़ीनैनों के द्वार पेनिस दिन बहार के देखूँ सपनेचेहरे की धूल क्याचंदा की चाँदनीउतरी तो रह गई मुख पे अपनेक्या जानूँ साजन होती है क्या ग़म की शामजल उठे सौ दिये जब लिया तेरा नामक्या जानूं साजन जबसे मिली नज़रमाथे पे बन गयेबिंदिया नयन तेरे देखो सजना
जबसे मिली नज़रमाथे पे बन गयेबिंदिया नयन तेरे देखो सजनाधर ली जो प्यार सेमेरी कलायियाँपिया तेरी उँगलियाँ हो गई कंगनाक्या जानूँ साजन होती है क्या ग़म की शामजल उठे सौ दिये जब लिया तेरा नामक्या जानूं साजन